तू बोली थी तू आएगी , मूज़े मालूम था नही
मैं फिर भी बैठे रहा , सोचता रहा
फिर कुछ अपनी बेवकूफ़यॉं पे अंदर ही अंदर हंसते रहा
शाम हुई , कुछ बारिशे पड़ी , कुछ धूप सिकी
कुछ रोया कुछ हंसा , फिर देर रात उठकर वापिस घर चला गया
तू बोली तो थी तू आएगी , मुझे मालूम था नही
मैं फिर भी बैठे रहा , सोचता रहा
फिर कुछ अपनी बेवकूफ़यॉं पे अंदर ही अंदर हंसते रहा
शाम हुई , कुछ बारिशे पड़ी , कुछ धूप सिकी
कुछ रोया कुछ हंसा , फिर देर रात उठकर वापिस घर चला गया
तू बोली तो थी तू आएगी , मुझे मालूम था नही