रूठा सा रहता है , टूटा सा रहता है
है जब कि साथ भी , छूटा सा रहता है
बेसुद सा जाने क्यों , हर पल वह रहता है
पूछे जो नाम उसका , बैचैनी कहता है
मीचो तो गीला सा , छूलो तो सीला सा
आँखों के कोनो मैं ,सोया सा रहता है
करता हर रोज़ चाहे , दिल भर के बात कितनी
फिर भी ना जाने क्यों , तनहा सा रहता है
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