मैं जब चुपके से कोने मैं , एक लम्हे मैं खोई हूं
हर एक पल अचानक से , कुछ थमता सा लगता है
ना आगे की कोई परवाह है , ना पीछे का कुछ याद मुझे
इस पल ज़रा कुछ जी लून ओर , है बस दिल से दरकार यही
कुछ सुन लू और कुछ बोल सकूं , कुछ जी लूं और कुछ मर जाऊं
हर रोज़ यह सन्नाटे भी अभ , कुछ ओर अपने से लगते है
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